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दुर्गा सप्तशतीका सिद्ध मन्त्र जप गरी आपत्ति, भय,रोग, पाप आदिबाट बच्नुहोस्

दुर्गा सप्तशतीका सिद्ध मन्त्र जप गरी आपत्ति, भय,रोग, पाप आदिबाट बच्नुहोस्

  • Naveen Sanchar

  • आइतवार, कार्तिक ५, २०८०

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दुर्गा सप्तशतीका सिद्ध मन्त्र जप गरी आपत्ति, भय,रोग, पाप आदिबाट बच्नुहोस्

आपत्त्ति उद्धारक
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवी नारायणि नमो स्तु ते ॥

भयनिवारक
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते।

भये भ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमो स्तु ते ॥

पापनाशक
हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत्।

सा घण्टा पातु नो देवी पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

रोगनाशक
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

पुत्र प्राप्तिका निम्ति
देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

इच्छित फलप्राप्ति
एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः

महामारी नाशक
जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तु ते ॥

शक्ति प्राप्तिका निम्ति
सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि।

गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तु ते ॥

इच्छित पति प्राप्तिका निम्ति
ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि।

नन्दगोपसुते देवी पतिं मे कुरु ते नमः ॥

इच्छित पत्नी प्राप्तिका निम्ति
पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोभ्दवाम् ॥


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